तेल और कोयले के बेतहाशा इस्तेमाल से दुनिया का तापमान बढ़ रहा है. जलवायु परिवर्तन की इस चुनौती से बचने के लिए हमें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना होगा. स्वच्छ ईंधन के ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल से हम इस चुनौती को कुछ हद तक कम कर सकते हैं.
ये रास्ता दिखा रहे हैं कुछ छोटे-छोटे द्वीप.
ब्रिटेन के उत्तर में स्कॉटलैंड के पास स्थित ओर्कने द्वीप समूहों ने स्वच्छ ईंधन के ऐसे विकल्प को इस्तेमाल करना शुरू किया है, जो आगे चल कर पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन सकती है.
ओर्कने आईलैंड काउंसिल ने तय किया है कि वो अपने ईंधन की पूर्ति हाइड्रोजन से करेगी.
यहां, पुराने पेट्रोल पंपों की जगह आप को कई हाइड्रोजन पंप दिखाई देंगे, जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगाए गए हैं.
ओर्कने द्वीप समूह ने हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर प्रयोग करने के प्रोजेक्ट की शुरुआत 2016 में की थी. 2017 में हाइड्रोजन से चलने वाली पांच वैन इन द्वीपों पर पहुंची थीं. लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती तो ये थी हाइड्रोजन ही नहीं मौजूद थी. योजना बनाने वालों ने ईंधन के टैंक भरने की व्यवस्था की, तो ऐसे मैकेनिक की कमी महसूस हुई, जो ख़राब हुई हाइ़ड्रोजन गाड़ियों की मरम्मत कर सके.
इसके लिए पहले एक विशेषज्ञ को तलाशा गया, जो हाइ़ड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों की मरम्मत कर सके. फिर, इसके लिए कई लोगों को ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद ओर्कने के क़ानूनों में बदलाव किए गए, ताकि समुद्री नौकाओं में डीज़ल की जगह हाइड्रोजन के इस्तेमाल की इजाज़त मिली. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक़ हुआ तो, 2021 तक ओर्कने में हाइड्रोजन से चलने वाली नौका लोगों को उनकी मंज़िलों तक पहुंचाने लगेगी.
पेट्रोल या डीज़ल के उलट हाइ़ड्रोजन जलाने से प्रदूषण नहीं होता. ऑक्सीजन के साथ मिलकर हाइ़ड्रोजन बिजली पैदा करती है, जिससे गाड़ी चलती है और इसके नतीजे में केवल पानी निकलता है. न तो धुआं निकलता है और न ही कोई ख़तरनाक गैस.
कारें चलाने के अलावा हाइड्रोजन से बिजली के उपकरण चलाए जा सकते हैं. ट्रेनें दौड़ाई जा सकती हैं और बड़े-बड़े जहाज़ भी.
अगर आपके पास ज़्यादा हाइड्रोजन है, तो आप बिना की ख़तरे के इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं.
लेकिन, हाइ़ड्रोजन पैदा करना मुश्किल काम है क्योंकि पर्यावरण में मौजूद हाइ़ड्रोजन अक्सर किसी न किसी और गैस के साथ मिली होती है. इसे अलग करने के लिए काफ़ी ईंधन की ज़रूरत पड़ती है, जो हो सकता है कि स्वच्छ ईंधन न हो.
हाइ़ड्रोजन तैयार करने का आसान तरीक़ा है मीथेन और कार्बन कैप्चर ऐंड स्टोरेज यानी सीसीएस (CCS). हालांकि, शुरुआत में तो इसकी लागत ज़्यादा होगी. मगर, धीरे-धीरे ये लागत कम होती जाएगी.
यूं तो हाइ़ड्रोजन तैयार करने में काफ़ी ईंधन लगेगा. मगर, ओर्कने के लोगों के लिए ये कोई समस्या नहीं है. क्योंकि इन द्वीपों पर समुद्री लहरों और हवा से भारी मात्रा में बिजली पैदा की जाती है. जो इनकी ज़रूरत से डेढ़ गुना ज़्यादा होती है. इसमें से काफ़ी बिजली, ओर्कने के लोग ब्रिटेन के नेशनल ग्रिड को बेचते हैं.
कई बार तो ये होता है कि ब्रिटेन का नेशनल ग्रिड ये बिजली लेने से मना कर देता है. अब हाइड्रोजन तैयार करने के प्लांट लगने से ओर्कने द्वीप समूह इस बची हुई बिजली का भी इस्तेमाल कर रहा है.
इस वक़्त ओर्कने में हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों के लिए इसे इडे नाम के द्वीप पर तैयार किया जाता है. इस द्वीप पर 130 लोग रहते हैं. यहां हवा से बिजली पैदा की जाती है. जिसका इन लोगों के लिए ज़्यादा इस्तेमाल नहीं है. इसलिए, ये सरप्लस बिजली हाइ़ड्रोजन निकालने में प्रयुक्त हो रही है.
ओर्कने द्वीपों के बीच आवाजाही अक्सर समुद्री नौकाओं की मदद से होती है. इन फेरी को चलाने के लिए डीज़ल का प्रयोग होता है. फिलहाल, ओर्कने द्वीप समूह में प्रदूषण की ये सब से बड़ी वजह है. इन फेरी से होने वाला शोर भी ध्वनि प्रदूषण का कारण है. दुनिया भर में कुल प्रदूषण का 2 फ़ीसद समुद्री जहाज़ों से होता है.
ओर्कने द्वीप समूहों में इन नावों से ही लोग रोज़ के सफ़र तय करते हैं. मेडिकल मदद से लेकर सामान पहुंचाने तक के तमाम काम फेरी से होते हैं. ओर्कने में प्रयोग होने वाले कुल तेल का एक तिहाई ये नावें ही इस्तेमाल करती हैं.
लेकिन, अब ओर्कने काउंसिल हाइड्रोजन ईंधन पर ज़ोर दे रही है. इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से हाइ़ड्रोजन बनाने का प्लांट पिछले साल तैयार हो गया है. यहां रोज़ 500 किलो हाइ़ड्रोजन बना करेगी. जिस से आगे चल कर ओर्कने के लोग अपनी नौकाएं भी चलाया करेंगे.
अगर ओर्कने द्वीप समूह आने वाले कुछ वर्षों में तेल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद भी कर देगा, तो भी बाक़ी दुनिया को उसकी मिसाल को अपनाने में कई दशक लग जाएंगे. फिलहाल तो, ओर्कने द्वीप समूह हाइड्रोजन से चलने वाली फेरी बनाने के काम में जुटे हैं. इन्हें स्कॉटलैंड के ग्लासगो बंदरगाह में बनाया जा रहा है.
हालांकि, ऐसे ही प्रयोग जापान और नार्वे-स्वीडन भी कर रहे हैं, ताकि स्वच्छ ईंधन से चलने वाले जहाज़ तैयार कर सकें. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने भी कहा है कि 2050 तक वो अपने कार्बन उत्सर्जन को 50 फ़ीसद कम करेगा.
ओर्कने के स्वच्छ ईंधन को अपनाने का एक फ़ायदा ये भी हुआ है कि यहां पर रोज़गार के नए अवसर पैदा हुए हैं. पहले, नए मौक़ों की कमी की वजह से यहां के बाशिंदों को अक्सर रोज़गार के लिए बाहर जाना पड़ता था. लेकिन, अब वो लोग यहां वापस आ कर अपनी रोज़ी कमा रहे हैं.
ओर्कने द्वीप समूह ने जिस तरह से स्वच्छ ईंधन को अपनाया है, वो पूरी दुनिया के लिए मिसाल है. अब तक तरक़्क़ी का कोई नया नुस्खा, पहले बड़े देशों में ही अपनाया जाता था और वो सबसे आख़िर में ओर्कने जैसे छोटे द्वीपों तक पहुंचता था.
लेकिन, ओर्कने द्वीप समूह ने स्वच्छ ईंधन के तौर पर हाइ़ड्रोजन का इस्तेमाल कर के दुनिया के सामने तरक़्क़ी की नई मिसाल पेश की है. और वो अपने इस तजुर्बे को बाक़ी दुनिया से साझा भी कर रहे हैं.
Tuesday, January 21, 2020
Monday, January 13, 2020
सऊदी अरब में भारी बर्फ़बारी, पर्यटकों की भीड़ बढ़ी
सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से ताबुक में बर्फ़बारी हुई है. बर्फ़बारी शुक्रवार सुबह से शुरू हुई थी.
अरब न्यूज़ के अनुसार बर्फ़ से जबल अल-लावज़, अल-दाहेर और अल्क़ान पर्वत ढँक गए हैं. सऊदी अरब का यह उत्तरी हिस्सा पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस इलाक़े में ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा रहता है इसलिए सरकार यहां सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है.
अरब न्यूज़ के अनुसार इस इलाक़े में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. प्रशासन ने लोगों को इस मौसम को लेकर सतर्क किया है. मौसम विभाग ने ताबुक, मदीना और उत्तरी सीमावर्ती इलाक़े में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.
अरबी अख़बार अशराक़ अल-अवसात के अनुसार सऊदी अरब में हर साल जबल अल-लावज़, जबल अल-ताहिर और ताबुक में जबल अल्क़ान पर्वतों पर दो से तीन हफ़्ते तक बर्फ़ गिरती है.
ये पहाड़ सऊदी अरब के उत्तर पश्चिमी इलाक़े में हैं. सऊदी में यहां बर्फ़ गिरने के बाद काफ़ी हलचल होती है.
बर्फ़ गिरने के बाद सऊदी के लोग भी इस इलाक़े में पहुंचने लगते हैं. ताबुक में टूरिज़म अथॉरिटी के जनसंपर्क अधिकारी वाइल अल-ख़ालदी ने अशराक़ अल-अवसात से कहा है, ''बर्फ़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. हमें उम्मीद है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. इस साल जब स्कूलों में छुट्टियां हैं तभी बर्फ़ भी गिरी है.''
जबल अल-लावज़ पहाड़ 2,600 मीटर ऊंचा है. इस पर्वत को अलमंड माउंटेन भी कहा जाता है क्योंकि इसके ढलान पर बड़ी संख्या में बादाम के पेड़ लगे हुए हैं.
हर साल इस पहाड़ पर बर्फ़बारी होती है और तापमान धड़ाम से नीचे चला आता है. ताबुक का शुमार सऊदी के सबसे ख़ूबसूरत इलाक़ों में है. यहां ख़ुश्बूदार पौधे हैं जिनका इस्तेमाल परफ़्यूम बनाने में होता है. ताबुक जॉर्डन की सीमा से लगा हुआ इलाक़ा है.
शाहिर बिन अतियाह ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है. इस वीडियो में दिख रहा है कि ताबुक में जमकर बर्फ़बारी हुई है. सारे पेड़ बर्फ़ में लिपटे हुए हैं. शाहिर ने लिखा है, ''क्या आप कल्पना कर सकते हैं? यह रूस नहीं है. इटली या नॉर्वे भी नहीं.''
एक और सोशल मीडिया यूज़र अब्दुल माजिद अल-शरीफ़ ने ट्वीट कर लिखा है, ''यह अल्लाह की इनायत है.''
पूरे मध्य-पूर्व में भारी बर्फ़बारी हो रही है. गल्फ़ न्यूज़ के अनुसार बुधवार को लेबनान के नैबतियेह प्रांत में भारी बर्फ़बारी से तीन लोगों की मौत हो गई है.
लेबनान के पश्चिमी इलाक़े के सारे पहाड़ बर्फ़ से ढँक गए है. ईरान, फ़लस्तीनी इलाक़े, लेबनान और जॉर्डन में भी भारी बर्फ़बारी हुई है. वेस्ट बैंक में रामल्लाह की सड़कें बर्फ़ से बंद हो गई है.
सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से ताबुक में बर्फ़बारी हुई है. बर्फ़बारी शुक्रवार सुबह से शुरू हुई थी.
अरब न्यूज़ के अनुसार बर्फ़ से जबल अल-लावज़, अल-दाहेर और अल्क़ान पर्वत ढँक गए हैं. सऊदी अरब का यह उत्तरी हिस्सा पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस इलाक़े में ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा रहता है इसलिए सरकार यहां सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है.
अरब न्यूज़ के अनुसार इस इलाक़े में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. प्रशासन ने लोगों को इस मौसम को लेकर सतर्क किया है. मौसम विभाग ने ताबुक, मदीना और उत्तरी सीमावर्ती इलाक़े में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.
अरबी अख़बार अशराक़ अल-अवसात के अनुसार सऊदी अरब में हर साल जबल अल-लावज़, जबल अल-ताहिर और ताबुक में जबल अल्क़ान पर्वतों पर दो से तीन हफ़्ते तक बर्फ़ गिरती है.
ये पहाड़ सऊदी अरब के उत्तर पश्चिमी इलाक़े में हैं. सऊदी में यहां बर्फ़ गिरने के बाद काफ़ी हलचल होती है.
बर्फ़ गिरने के बाद सऊदी के लोग भी इस इलाक़े में पहुंचने लगते हैं. ताबुक में टूरिज़म अथॉरिटी के जनसंपर्क अधिकारी वाइल अल-ख़ालदी ने अशराक़ अल-अवसात से कहा है, ''बर्फ़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. हमें उम्मीद है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. इस साल जब स्कूलों में छुट्टियां हैं तभी बर्फ़ भी गिरी है.''
अरब न्यूज़ के अनुसार बर्फ़ से जबल अल-लावज़, अल-दाहेर और अल्क़ान पर्वत ढँक गए हैं. सऊदी अरब का यह उत्तरी हिस्सा पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस इलाक़े में ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा रहता है इसलिए सरकार यहां सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है.
अरब न्यूज़ के अनुसार इस इलाक़े में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. प्रशासन ने लोगों को इस मौसम को लेकर सतर्क किया है. मौसम विभाग ने ताबुक, मदीना और उत्तरी सीमावर्ती इलाक़े में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.
अरबी अख़बार अशराक़ अल-अवसात के अनुसार सऊदी अरब में हर साल जबल अल-लावज़, जबल अल-ताहिर और ताबुक में जबल अल्क़ान पर्वतों पर दो से तीन हफ़्ते तक बर्फ़ गिरती है.
ये पहाड़ सऊदी अरब के उत्तर पश्चिमी इलाक़े में हैं. सऊदी में यहां बर्फ़ गिरने के बाद काफ़ी हलचल होती है.
बर्फ़ गिरने के बाद सऊदी के लोग भी इस इलाक़े में पहुंचने लगते हैं. ताबुक में टूरिज़म अथॉरिटी के जनसंपर्क अधिकारी वाइल अल-ख़ालदी ने अशराक़ अल-अवसात से कहा है, ''बर्फ़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. हमें उम्मीद है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. इस साल जब स्कूलों में छुट्टियां हैं तभी बर्फ़ भी गिरी है.''
जबल अल-लावज़ पहाड़ 2,600 मीटर ऊंचा है. इस पर्वत को अलमंड माउंटेन भी कहा जाता है क्योंकि इसके ढलान पर बड़ी संख्या में बादाम के पेड़ लगे हुए हैं.
हर साल इस पहाड़ पर बर्फ़बारी होती है और तापमान धड़ाम से नीचे चला आता है. ताबुक का शुमार सऊदी के सबसे ख़ूबसूरत इलाक़ों में है. यहां ख़ुश्बूदार पौधे हैं जिनका इस्तेमाल परफ़्यूम बनाने में होता है. ताबुक जॉर्डन की सीमा से लगा हुआ इलाक़ा है.
शाहिर बिन अतियाह ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है. इस वीडियो में दिख रहा है कि ताबुक में जमकर बर्फ़बारी हुई है. सारे पेड़ बर्फ़ में लिपटे हुए हैं. शाहिर ने लिखा है, ''क्या आप कल्पना कर सकते हैं? यह रूस नहीं है. इटली या नॉर्वे भी नहीं.''
एक और सोशल मीडिया यूज़र अब्दुल माजिद अल-शरीफ़ ने ट्वीट कर लिखा है, ''यह अल्लाह की इनायत है.''
पूरे मध्य-पूर्व में भारी बर्फ़बारी हो रही है. गल्फ़ न्यूज़ के अनुसार बुधवार को लेबनान के नैबतियेह प्रांत में भारी बर्फ़बारी से तीन लोगों की मौत हो गई है.
लेबनान के पश्चिमी इलाक़े के सारे पहाड़ बर्फ़ से ढँक गए है. ईरान, फ़लस्तीनी इलाक़े, लेबनान और जॉर्डन में भी भारी बर्फ़बारी हुई है. वेस्ट बैंक में रामल्लाह की सड़कें बर्फ़ से बंद हो गई है.
सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से ताबुक में बर्फ़बारी हुई है. बर्फ़बारी शुक्रवार सुबह से शुरू हुई थी.
अरब न्यूज़ के अनुसार बर्फ़ से जबल अल-लावज़, अल-दाहेर और अल्क़ान पर्वत ढँक गए हैं. सऊदी अरब का यह उत्तरी हिस्सा पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस इलाक़े में ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा रहता है इसलिए सरकार यहां सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है.
अरब न्यूज़ के अनुसार इस इलाक़े में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. प्रशासन ने लोगों को इस मौसम को लेकर सतर्क किया है. मौसम विभाग ने ताबुक, मदीना और उत्तरी सीमावर्ती इलाक़े में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.
अरबी अख़बार अशराक़ अल-अवसात के अनुसार सऊदी अरब में हर साल जबल अल-लावज़, जबल अल-ताहिर और ताबुक में जबल अल्क़ान पर्वतों पर दो से तीन हफ़्ते तक बर्फ़ गिरती है.
ये पहाड़ सऊदी अरब के उत्तर पश्चिमी इलाक़े में हैं. सऊदी में यहां बर्फ़ गिरने के बाद काफ़ी हलचल होती है.
बर्फ़ गिरने के बाद सऊदी के लोग भी इस इलाक़े में पहुंचने लगते हैं. ताबुक में टूरिज़म अथॉरिटी के जनसंपर्क अधिकारी वाइल अल-ख़ालदी ने अशराक़ अल-अवसात से कहा है, ''बर्फ़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. हमें उम्मीद है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. इस साल जब स्कूलों में छुट्टियां हैं तभी बर्फ़ भी गिरी है.''
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